चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नेतृत्व में विद्वान जजों की खंडपीठ ने SC ST एक्ट 1989 के दुरुपयोग पर सम्यक विचारोपरान्त रोक लगाते हुए आदेश पारित किया कि दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रथम दृष्टया जांच कर अपराध दर्ज किए जाएंगे तथा विशेष परिस्थितियों में गिरफ्तारी की जाएगी।
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जिसे खारिज कर दिया गया फिर केंद्र ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की ऐसी की तैसी कर दिया और पुराना कानून बहाल हो गया।
हम दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर संपूर्ण रूप से कड़ी कार्यवाही के पक्षधर हैं किंतु यह सिद्धांत भी प्रतिपादित है कि दोषी भले ही छूट जाए किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
सच्चाई तो यह है कि इस कानून का सर्वाधिक नाजायज लाभ अपराधी तस्कर माफिया गंदे नेता एवं भ्रष्ट अधिकारी उठाएंगे, जैसा कि होता आ रहा है।
किसी दलित को तैयार करेंगे कुछ पैसे देंगे यदि वह नशा करता होगा तो दारू पिलाएंगे और प्रार्थना पत्र दिलवाकर अपराध दर्ज करा देंगे।
खेद है किसी राजनीतिक दल ने इस पर प्रतिवाद नहीं किया अर्थात सभी को दलित वोट बैंक दीख रहा है।
स्वयं हमारे पर ऐसी ही घटना घटित हुई थी जिसे मैं अपने वीडियो के माध्यम से आप सभी तक संप्रेषित कर रहा हूं।
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दलित वोट के लिए हुजूर का गन्दा कृत्य। Brajbhushan dubey braj bhushan iitk | |
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| Non-profits & Activism | Upload TimePublished on 11 Aug 2018 |
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